ना कर मुझसे बेईम्तिहा मोहब्बत तू।।
गर दो घुट शराब के बाद बेवफ़ाई करनी है।।
Voh Nafrat Ki Vajah Dhundhta Raha,
Main Bewajah Mohabbat Karta Raha…
आदत उनकी कुछ इस तरह हो गई,
उनकी बेरुखी से भी मोहब्बत हो गई…
वही मुझको अकेला कर गया ,
जो दुआ में मुझे मांगता था कभी….
उनको उलझा के कुछ देर सवालो मे,
हमने जी भर के देख लिया उनको…
बड़ी मुश्किल से सीखा है, खुश रहना उसके बगैर,
अब सुना है, ये बात भी उसे परेशान करती…
कभी ना कभी वो मेरे बारे में सोचेगी जरूर,
कि हासिल होने की उम्मीद ना थी फिर भी मोहब्बत करता था…
हर वक्त जुबाँ पर यूँ गाली न रखा करो,
ज़हमते बहुत उठा ली,अब ये खून की प्याली न रखा करो।
Khud Ke Kandhon Par Jeena Seekh Eh Sathi,
Insaan Ka Koi Bharosha Nahi Kab Palat Jaye…
बहुत तकलीफ देती है ना मेरी बातें तुम्हें
देख लेना एक दिन मेरी खामोशी तुम्हें रुला देगी।
किसी ने कहा आपकी आँखे बड़ी खूबसूरत है,
मैने कह दिया कि, बारिश के बाद अक्सर मौसम सुहाना हो जाता है
बेवफा कहने से पहले मेरी रग रग का खून निचोड़ लेना..
कतरे कतरे से वफ़ा ना मिले तो बेशक मुझे छोड़ देना।
Pata nahi yar kon jitega
Teri yaade ya mere aansu
Dono rukne ka Nam hi lete
Rakh lo apne sath mujhe ……
Koi puche to keh dena ghulam hai mera …
आग दिल मे लगी जब वो खफा हुए,
महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए,
कर के वफ़ा कुछ दे ना सके वो ,
पर बहुत कुछ दे गये जब वो बेवफा हुए..
Hus hus k kare baten wo jake raqeebo se
Nadan hai kya jane dil bhi koi jalta hai
यूँ न देख नफरत से मुझे…वही चेहरा है जिसे आपने टूट कर चाहा था…!!
वो अपनी तन्हाई की खातिर फिर आ मिला मुझसे, हम नादान ये समझे हमारी दुआओं में असर है।
Wafayein koi humse seekhe “kaif”
Jise toot ke chaha usey khabar bhi nahi …
fasle to aaj bhi darmiya h “tere” or “mere” ……
log to yuhi tere Naam se mujhe badnaam krte h…..
खामोश बैठे हैं तो वो कहते हैं उदासी अच्छी नहीं
जरा सा हँस लें तो हँसने कि बजाह पूछ लेते हैं।
कितनी क़ातिल है ये आरज़ू ज़िंदगी की
मर जाते है किसी पर लोग जीने के लिए..!!
हजारों अश्क़ मेरीआँखों की हिरासत में थे…
फिर तेरी याद आई और इन्हें जमानत मिल गई.!!!!!!!!!
पता नहीं लोग कैसे जला देते हैं
अपने प्यार कि निशानियां,,,
एक हम हैं जो उनकी यादों को भी गले से लगाये बैठे हैं।
Wo apne hi hote jo lafzo se maar dete hai
Warna gairo ko kya khabar,
Dil kis baat par dukhta hai
मैं कड़ी धुप में चलता हु इस यकींन के साथ,
मैं जलूँगा तो मेरे घर में उजाले होंगे.!!
लोग मेरी दीवानगी को फ़कीरी समझते रहे। मैं तो उसे देखने की ख़ातिर भीख मांगता रहा।
.इस दुनिया मेँ अजनबी रहना ही ठीक है….
लोग बहुत तकलीफ देते है अक्सर अपना बना कर
Mohabbat kya hai ye batata hu tumhe…
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Tera majboor kar dena mera majboor ho jana…
मैं इतनी छोटी कहानी भी न था,
तुम्हें ही जल्दी थी किताब बदलने की।।
बिना लिबास आए थे इस
जहां में,
बस एक कफ़न की खातिर,
इतना सफर करना पड़ा
समय के एक तमाचे की देर
है प्यारे,
मेरी फकीरी भी क्या,
तेरी बादशाही भी क्या..